श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  12.111.81 
समर्थ इति संगृह्य स्थापयित्वा परीक्षित:।
कृतं च समयं भित्त्वा त्वयाहमवमानित:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
‘आपने मुझे योग्य समझकर अपना लिया और मंत्री बनाकर मेरी परीक्षा ली। तत्पश्चात् आपने अपनी प्रतिज्ञा भंग करके मेरा अपमान किया॥ 81॥
 
‘You considered me worthy and adopted me and tested me by appointing me as a minister. After this, you broke your promise and insulted me.॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)