Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.111.75: सियार ने देखा कि उसके स्वामी का हृदय प्रेम से भर गया है, इसलिए उसने उसे प्रणाम किया और अश्रुपूर्ण शब्दों में इस प्रकार बोलना शुरू किया:   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  12.111.75 
तं स गोमायुरालोक्य स्नेहादागतसम्भ्रमम्।
उवाच प्रणतो वाक्यं बाष्पगद्‍गदया गिरा॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
सियार ने देखा कि उसके स्वामी का हृदय प्रेम से भर गया है, इसलिए उसने उसे प्रणाम किया और अश्रुपूर्ण शब्दों में इस प्रकार बोलना शुरू किया:
 
The jackal saw that his master's heart was filled with love, so he bowed to him and began speaking with tearful words as follows:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)