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mahabharat 12.111.71: तत्पश्चात् उसी शत्रु समूह में से एक धर्मात्मा सियार (जो सिंह का गुप्तचर बन गया था) आया और उसने सिंह को सियार के साथ किए गए छल-कपट के विषय में बताया।   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  12.111.71 
तस्मादप्यरिसंघाताद् गोमायो: कश्चिदागत:।
धर्मात्मा तेन चाख्यातं यथैतत् कपटं कृतम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसी शत्रु समूह में से एक धर्मात्मा सियार (जो सिंह का गुप्तचर बन गया था) आया और उसने सिंह को सियार के साथ किए गए छल-कपट के विषय में बताया।
 
Thereafter a pious jackal (who had become the lion's spy) came from among the same enemy group and told the lion about the deceit and fraud that had been played on the jackal. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)