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mahabharat 12.111.68: ‘बेटा! यदि कोई शक्तिशाली राजा किसी दूसरे व्यक्ति को मरवा दे, तो उसके लिए यह कोई कठिन कार्य नहीं है; किन्तु यदि शक्तिशाली पुरुषों में क्षमा की भावना हो, तो संसार में उनकी ही प्रशंसा होती है और उनके कारण राजाओं की कीर्ति बढ़ती है। 68.   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.111.68 
न दुष्करमिदं पुत्र यत् प्रभुर्घातयेत् परम्।
श्लाघनीया यशस्या च लोके प्रभवतां क्षमा॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! यदि कोई शक्तिशाली राजा किसी दूसरे व्यक्ति को मरवा दे, तो उसके लिए यह कोई कठिन कार्य नहीं है; किन्तु यदि शक्तिशाली पुरुषों में क्षमा की भावना हो, तो संसार में उनकी ही प्रशंसा होती है और उनके कारण राजाओं की कीर्ति बढ़ती है। 68.
 
‘Son! If a powerful king gets another person killed, it is not a difficult task for him; but if powerful men have the feeling of forgiveness, then only they are praised in the world and due to them the glory of kings increases. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)