Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.111.67: अतः प्रत्यक्ष दिखाई देने वाली वस्तुओं की भी परीक्षा करना उचित है। जो मनुष्य किसी वस्तु के भले-बुरे को परखकर उसे करने की आज्ञा देता है, उसे बाद में पश्चाताप नहीं करना पड़ता। 67. | mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः प्रत्यक्ष दिखाई देने वाली वस्तुओं की भी परीक्षा करना उचित है। जो मनुष्य किसी वस्तु के भले-बुरे को परखकर उसे करने की आज्ञा देता है, उसे बाद में पश्चाताप नहीं करना पड़ता। 67.
‘Therefore it is appropriate to test even the things which are directly visible. One who tests and examines the good and bad of something and then orders it to be done, does not have to repent later. 67.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥