श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.111.66 
तलवद् दृश्यते व्योम खद्योतो हव्यवाडिव।
न चैवास्ति तलं व्योम्नि खद्योते न हुताशन:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
आकाश उलटे तवे के तले के समान प्रतीत होता है और जुगनू अग्नि के समान प्रतीत होता है; परन्तु आकाश में कोई तल नहीं है और जुगनू में कोई अग्नि नहीं है।
 
‘The sky appears like the bottom of an upside-down frying pan and the firefly appears like fire; but there is no bottom in the sky and no fire in the firefly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)