श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 61-62
 
 
श्लोक  12.111.61-62 
लुब्धानां शुचयो द्वेष्या: कातराणां तरस्विन:॥ ६१॥
मूर्खाणां पण्डिता द्वेष्या दरिद्राणां महाधना:।
अधार्मिकाणां धर्मिष्ठा विरूपाणां सुरूपिण:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
लोभी लोग स्वार्थी से, कायर लोग बलवान से, मूर्ख लोग विद्वान से, दरिद्र लोग धनवान से, पापी लोग पुण्यात्मा से और कुरूप लोग सुन्दर से घृणा करते हैं॥ 61-62॥
 
‘Greedy people hate the selfless, cowards hate the strong, fools hate the learned, the poor hate the rich, sinners hate the virtuous and the ugly hate the beautiful.॥ 61-62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)