Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.111.59: जिनके मन में शुद्ध भाव नहीं होते, वे काम में डाँट पड़ने पर निर्दोष को दोष देते हैं। अपने से ऊँचे पद पर किसी को देखकर कुछ लोग ईर्ष्या के कारण उसे सहन नहीं कर पाते। यही प्रक्रिया वैर-भाव को जन्म देती है॥ 59॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.111.59 
कर्मसंघर्षजैर्दोषैर्दुष्येताशुचिभि: शुचि:।
नोच्छ्रितं सहते कश्चित् प्रक्रिया वैरकारिका॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जिनके मन में शुद्ध भाव नहीं होते, वे काम में डाँट पड़ने पर निर्दोष को दोष देते हैं। अपने से ऊँचे पद पर किसी को देखकर कुछ लोग ईर्ष्या के कारण उसे सहन नहीं कर पाते। यही प्रक्रिया वैर-भाव को जन्म देती है॥ 59॥
 
‘People who do not have pure intentions in their minds, when they are scolded in work, blame the innocent. Seeing someone in a higher position than them, some people cannot tolerate it due to jealousy. This is the process that gives rise to animosity.॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)