श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.111.48 
भीष्म उवाच
क्षुधितस्य मृगेन्द्रस्य भोक्तुमभ्युत्थितस्य च।
भोजनायोपहर्तव्यं तन्मांसं नोपदृश्यते॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! जब सिंह को भूख लगी और वह भोजन करने के लिए उठा, तो उसे परोसा हुआ मांस दिखाई नहीं दिया।
 
Bhishma says - King! When the lion got hungry and got up to eat, he could not see the meat that was being served to him. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)