श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.111.40 
तं तथा सुकृतं दृष्ट्वा पूज्यमानं स्वकर्मसु।
प्राद्विषन् कृतसंघाता: पूर्वभृत्या मुहुर्मुहु:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
सियार बहुत अच्छे काम करने लगा और अपने सभी कामों के लिए उसे खूब प्रशंसा मिलने लगी। उसे इस प्रकार सम्मानित होते देख पहले के राजसेवक संगठित होकर उससे बार-बार द्वेष करने लगे।
 
The jackal started doing very good work and started getting a lot of praise for all his works. Seeing him being honored in this way, the earlier royal servants got organized and started hating him repeatedly. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)