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mahabharat 12.111.35: तुम्हें मेरे प्रियजनों का आदर करना होगा। मेरी हितकारी बातें तुम्हें माननी होंगी। तुमने मेरे लिए जो आजीविका का प्रबंध किया है, वह तुम्हारे पास स्थिर और सुरक्षित रहनी चाहिए। 35।   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.111.35 
मदीया माननीयास्ते श्रोतव्यं च हितं वच:।
कल्पिता या च मे वृत्ति: सा भवेत् त्वयि सुस्थिरा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें मेरे प्रियजनों का आदर करना होगा। मेरी हितकारी बातें तुम्हें माननी होंगी। तुमने मेरे लिए जो आजीविका का प्रबंध किया है, वह तुम्हारे पास स्थिर और सुरक्षित रहनी चाहिए। 35।
 
You have to respect my loved ones. You have to listen to the beneficial things I say. The livelihood that you have arranged for me should remain stable and safe with you. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)