श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.111.28 
दीर्घदर्शी महोत्साह: स्थूललक्ष्यो महाबल:।
कृती चामोघकर्तासि भाग्यैश्च समलंकृत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
आप दूरदर्शी, अति उत्साही, स्पष्ट लक्ष्य वाले, पराक्रमी, सिद्धिप्राप्त, यशस्वी और सौभाग्य से सुशोभित हैं॥ 28॥
 
You are far-sighted, very enthusiastic, have a clear aim, are mighty, accomplished, and are successful and are adorned with good fortune.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)