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mahabharat 12.111.23-24: हे महात्मन! इसके लिए आपको ऐसे व्यक्तियों को सहायक या सचिव के रूप में नियुक्त करना चाहिए जो आपके प्रति स्नेही हों, नीति के ज्ञाता हों, सद्भावना रखते हों, दल-भेद से रहित हों, विजय की इच्छा रखते हों, लोभ से रहित हों, छल-कपट में कुशल हों, बुद्धिमान हों, स्वामी के हित में तत्पर हों और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले हों। आपको उनका पिता या गुरु के समान आदर करना चाहिए॥ 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  12.111.23-24 
सहायाननुरक्तांश्च नयज्ञानुपसंहितान्।
परस्परमसंसृष्टान् विजिगीषूनलोलुपान्॥ २३॥
अनतीतोपधान् प्राज्ञान् हिते युक्तान् मनस्विन:।
पूजयेथा महाभाग यथाऽऽचार्यान् यथा पितॄन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! इसके लिए आपको ऐसे व्यक्तियों को सहायक या सचिव के रूप में नियुक्त करना चाहिए जो आपके प्रति स्नेही हों, नीति के ज्ञाता हों, सद्भावना रखते हों, दल-भेद से रहित हों, विजय की इच्छा रखते हों, लोभ से रहित हों, छल-कपट में कुशल हों, बुद्धिमान हों, स्वामी के हित में तत्पर हों और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले हों। आपको उनका पिता या गुरु के समान आदर करना चाहिए॥ 23-24॥
 
O great man! For this you should appoint such persons as assistants or secretaries who are affectionate towards you, who are knowledgeable in ethics, have good will, are devoid of any factionalism, have a desire for victory, are devoid of greed, are skilled in deceit, are intelligent, are ready to serve the interests of their master and are of a strong will. You should respect them like a father or a teacher.॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)