श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.111.21 
गोमायुरुवाच
सदृशं मृगराजैतत् तव वाक्यं मदन्तरे।
यत् सहायान् मृगयसे धर्मार्थकुशलान् शुचीन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
गीदड़ बोला - हे मृगराज! आपने मेरे लिए जो कहा है, वह आपके लिए सर्वथा उपयुक्त है और धर्म और अर्थ में कुशल तथा शुद्ध स्वभाव वाले सहायकों (मंत्रियों) की जो आप खोज कर रहे हैं, वह भी उपयुक्त है॥ 21॥
 
The jackal said - O King of the deer! What you have said for me is completely appropriate for you and the search that you are doing for helpers (ministers) who are skilled in Dharma and economics and have a pure nature is also appropriate. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)