आश्रमे यो द्विजं हन्याद् गां वा दद्यादनाश्रमे।
किं तु तत्पातकं न स्यात् तद्वा दत्तं वृथा भवेत्॥ १४॥
अनुवाद
यदि कोई आश्रम में रहकर ब्राह्मण की हत्या करे, तो क्या उसे पाप नहीं लगेगा? और यदि कोई आश्रम में रहकर गौदान करे, तो क्या वह व्यर्थ होगा?॥14॥
'If someone kills a Brahmin while staying in an ashram, will he not commit any sin? And if someone donates a cow without being in an ashram, will it be futile?॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥