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mahabharat 12.110.7: जो मनुष्य मन, वचन और कर्म से कोई पाप नहीं करते तथा किसी प्राणी को कष्ट नहीं पहुँचाते, वे भी क्लेशों पर विजय प्राप्त करते हैं ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.110.7 
ये वा पापं न कुर्वन्ति कर्मणा मनसा गिरा।
निक्षिप्तदण्डा भूतेषु दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मन, वचन और कर्म से कोई पाप नहीं करते तथा किसी प्राणी को कष्ट नहीं पहुँचाते, वे भी क्लेशों पर विजय प्राप्त करते हैं ॥7॥
 
Those who do not commit any sin by their thoughts, words and actions and do not harm any living being, they too overcome the troubles. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)