Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.110.4: जो दूसरों के कठोर वचनों या निन्दा का उत्तर नहीं देते, मार खाने पर भी किसी को नहीं मारते, जो देते हैं पर दूसरों से माँगते नहीं, वे भी कठिन से कठिन संकटों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं ॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रत्याहुर्नोच्यमाना ये न हिंसन्ति च हिंसिता:।
प्रयच्छन्ति न याचन्ते दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ ४॥
अनुवाद
जो दूसरों के कठोर वचनों या निन्दा का उत्तर नहीं देते, मार खाने पर भी किसी को नहीं मारते, जो देते हैं पर दूसरों से माँगते नहीं, वे भी कठिन से कठिन संकटों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं ॥4॥
Those who do not reply to harsh words or criticism of others, who do not hit anyone even after being beaten, who give but do not ask from others, they too overcome difficult difficulties. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥