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mahabharat 12.110.23: जिनका भोजन स्वाद के लिए नहीं, अपितु जीवन-यात्रा को चलाने के लिए है, जो विषय-वासनाओं की तृप्ति के लिए नहीं, अपितु सन्तान प्राप्ति की इच्छा से मैथुन करते हैं और जिनकी वाणी केवल सत्य बोलने के लिए है, वे सब क्लेशों पर विजय प्राप्त करते हैं॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.110.23 
यात्रार्थं भोजनं येषां संतानार्थं च मैथुनम्।
वाक् सत्यवचनार्थाय दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जिनका भोजन स्वाद के लिए नहीं, अपितु जीवन-यात्रा को चलाने के लिए है, जो विषय-वासनाओं की तृप्ति के लिए नहीं, अपितु सन्तान प्राप्ति की इच्छा से मैथुन करते हैं और जिनकी वाणी केवल सत्य बोलने के लिए है, वे सब क्लेशों पर विजय प्राप्त करते हैं॥23॥
 
Those whose food is not for taste but to sustain the journey of life, who are engaged in sexual intercourse not for the satisfaction of sensual desires but for the desire of having children and whose speech is only for speaking the truth, they overcome all troubles. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)