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mahabharat 12.110.11: जो लोग अपने प्राणों की हानि होने पर भी सत्य बोलना नहीं छोड़ते, वे सभी जीवों के विश्वासपात्र बने रहते हैं और सभी दुःखों पर विजय प्राप्त करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.110.11 
ये वदन्तीह सत्यानि प्राणत्यागेऽप्युपस्थिते।
प्रमाणभूता भूतानां दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो लोग अपने प्राणों की हानि होने पर भी सत्य बोलना नहीं छोड़ते, वे सभी जीवों के विश्वासपात्र बने रहते हैं और सभी दुःखों पर विजय प्राप्त करते हैं।
 
Those who do not give up speaking the truth even when faced with the possibility of losing their lives, remain trusted by all living beings and overcome all sorrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)