श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.11.2 
केचिद् गृहान् परित्यज्य वनमभ्यागमन् द्विजा:।
अजातश्मश्रवो मन्दा: कुले जाता: प्रवव्रजु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
एक समय कुछ मंदबुद्धि कुलीन ब्राह्मण बालक घर छोड़कर वन में चले गए। वे बचपन में ही, दाढ़ी-मूँछ भी नहीं उगने देते थे।॥2॥
 
Once, some dull-witted Brahmin boys of noble family left their homes and went to the forest. They left their homes when they were still young, before they even grew a moustache or beard.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)