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mahabharat 12.11.10: ऋषि बोले—पिताजी! हम आपकी बात मानेंगे। आप तो सब मार्ग जानते हैं। हे पुण्यात्मा! हम आपकी आज्ञा में रहना चाहते हैं। आप हमें उपदेश दीजिए।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.11.10 
ऋषय ऊचु:
शृणुमस्ते वचस्तात पन्थानो विदितास्तव।
नियोगे चैव धर्मात्मन् स्थातुमिच्छाम शाधि न:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले—पिताजी! हम आपकी बात मानेंगे। आप तो सब मार्ग जानते हैं। हे पुण्यात्मा! हम आपकी आज्ञा में रहना चाहते हैं। आप हमें उपदेश दीजिए।॥10॥
 
The sage said—Father! We will listen to you. You know all the ways. O virtuous one! We want to remain under your command. You give us advice.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)