श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.11.1 
अर्जुन उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
तापसै: सह संवादं शक्रस्य भरतर्षभ॥ १॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे भरतश्रेष्ठ! इस विषय के जानकार लोग इन्द्र और तपस्वियों के संवाद की प्राचीन कथा का उदाहरण देते हैं।॥1॥
 
Arjuna said - O best of the Bharatas! People knowledgeable about this subject cite the example of the ancient story of the conversation between Indra and the ascetics. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)