Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.107.7: भारत! मुझे यह सुनने की बड़ी इच्छा है कि गणतन्त्र राज्यों के लोग किस प्रकार उन्नति करते हैं, किस प्रकार वे आपस में मतभेद या फूट नहीं पड़ने देते, किस प्रकार वे शत्रुओं पर विजय पाने का प्रयत्न करते हैं और किस प्रकार वे मित्र बनाते हैं॥ 7॥ | mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा गणा: प्रवर्धन्ते न भिद्यन्ते च भारत।
अरींश्च विजिगीषन्ते सुहृद: प्राप्नुवन्ति च॥ ७॥
अनुवाद
भारत! मुझे यह सुनने की बड़ी इच्छा है कि गणतन्त्र राज्यों के लोग किस प्रकार उन्नति करते हैं, किस प्रकार वे आपस में मतभेद या फूट नहीं पड़ने देते, किस प्रकार वे शत्रुओं पर विजय पाने का प्रयत्न करते हैं और किस प्रकार वे मित्र बनाते हैं॥ 7॥
Bharat! I have a great desire to hear about the way in which the people of republican states progress, the way in which they do not allow differences or divisions to arise amongst themselves, the way in which they try to gain victory over their enemies and the means by which they gain friends.॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥