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mahabharat 12.107.26-27h: संघ राज्य के विद्वान अधिकारियों को चाहिए कि वे जनता में से उन मुख्य नेताओं का तुरन्त दमन करें जो आपस में फूट डालकर अलग-अलग अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहे हैं। 26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  12.107.26-27h 
तेषामन्योन्यभिन्नानां स्वशक्तिमनुतिष्ठताम्॥ २६॥
निग्रह: पण्डितै: कार्य: क्षिप्रमेव प्रधानत:।
 
 
अनुवाद
संघ राज्य के विद्वान अधिकारियों को चाहिए कि वे जनता में से उन मुख्य नेताओं का तुरन्त दमन करें जो आपस में फूट डालकर अलग-अलग अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहे हैं। 26 1/2॥
 
The learned officers of the Union State should immediately suppress the main leaders among the people who are dividing among themselves and exercising their power separately. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)