Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.107.11: पहले एक मनुष्य लोभ को चुनता है (दूसरे का धन हड़पने की इच्छा करता है), फिर दूसरे के मन में द्वेष उत्पन्न होता है; तब लोभ और द्वेष से प्रभावित दोनों व्यक्ति एक-दूसरे के नाशक बन जाते हैं, तथा समुदाय, धन और जन की बड़ी हानि उठाते हैं॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोभमेको हि वृणुते ततोऽमर्षमनन्तरम्।
तौ क्षयव्ययसंयुक्तावन्योन्यं च विनाशिनौ॥ ११॥
अनुवाद
पहले एक मनुष्य लोभ को चुनता है (दूसरे का धन हड़पने की इच्छा करता है), फिर दूसरे के मन में द्वेष उत्पन्न होता है; तब लोभ और द्वेष से प्रभावित दोनों व्यक्ति एक-दूसरे के नाशक बन जाते हैं, तथा समुदाय, धन और जन की बड़ी हानि उठाते हैं॥ 11॥
First a person chooses greed (desires to take the wealth of another person), then resentment arises in the mind of the other person; then both the persons affected by greed and resentment become each other's destroyers, suffering a great loss of community, wealth and people.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥