Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.8: मैं उन मनुष्यों के लिए निरन्तर शोक करता हूँ जिनका सुख धन पर आधारित है, अर्थात् जो धन को ही अपना एकमात्र सुख मानते हैं; क्योंकि मेरे पास बहुत धन था, परन्तु वह स्वप्न में प्राप्त धन के समान नष्ट हो गया॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं उन मनुष्यों के लिए निरन्तर शोक करता हूँ जिनका सुख धन पर आधारित है, अर्थात् जो धन को ही अपना एकमात्र सुख मानते हैं; क्योंकि मेरे पास बहुत धन था, परन्तु वह स्वप्न में प्राप्त धन के समान नष्ट हो गया॥8॥
I constantly grieve for those people whose happiness is based on wealth, i.e. those who consider money to be their only source of happiness; because I had a lot of wealth, but it was all destroyed like wealth obtained in a dream. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥