हे राजन! अब आपके लिए धन की कोई संभावना नहीं है। आपके मंत्री नष्ट हो चुके हैं और भाग्य भी आपके विरुद्ध है। ऐसी स्थिति में आप अपने लिए कौन-सा मार्ग श्रेष्ठ समझते हैं?॥ 54॥
O King! There is no possibility of wealth for you now. You have lost your ministers and the fate is also against you. In such a situation, which path do you think is best for you?॥ 54॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि कालकवृक्षीये चतुरधिकशततमोऽध्याय:॥ १०४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कालकवृक्षीय मुनिका उपदेशविषयक एक सौ चारवाँ अध्याय पूरा हआ॥ १०४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५८ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥