Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.47: अपनी इन्द्रियों को वश में करो, मन को वश में करो और वाणी को वश में करके मौन रहो। चाहे तुम्हारा मन, वाणी और इन्द्रियाँ दुर्बल हों या हानिकारक, तुम्हारे अतिरिक्त कोई भी ऐसा नहीं है जो उन्हें सांसारिक सुखों की ओर जाने से रोक सके। | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपनी इन्द्रियों को वश में करो, मन को वश में करो और वाणी को वश में करके मौन रहो। चाहे तुम्हारा मन, वाणी और इन्द्रियाँ दुर्बल हों या हानिकारक, तुम्हारे अतिरिक्त कोई भी ऐसा नहीं है जो उन्हें सांसारिक सुखों की ओर जाने से रोक सके।
Control your senses, control your mind and remain silent by controlling your speech. Whether your mind, speech and senses are weak or harmful, there is no one else except you who can stop them from going towards worldly pleasures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥