Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.37: उपर्युक्त ज्ञान को समझने का प्रयत्न करो और इन सुखों को, जो तुम्हें भौतिक पदार्थों के वेश में बुरे लगते हैं, त्याग दो; क्योंकि वास्तव में सभी सुख बुरे स्वरूप ही हैं ॥37॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपर्युक्त ज्ञान को समझने का प्रयत्न करो और इन सुखों को, जो तुम्हें भौतिक पदार्थों के वेश में बुरे लगते हैं, त्याग दो; क्योंकि वास्तव में सभी सुख बुरे स्वरूप ही हैं ॥37॥
Try to understand the above mentioned wisdom and give up these pleasures, which appear to you as evils in the guise of material things; because in reality all pleasures are in the form of evil. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥