Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.29: कोसलराज! क्या तुम संयोग से जो कुछ भी प्राप्त करोगे, उसे लेकर पहले की तरह ही आनंदपूर्वक रह सकोगे? आज राजसी धन से वंचित होने पर भी क्या तुमने शुद्ध हृदय से शोक का त्याग कर दिया है?॥29॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथालब्धोपपन्नार्थैस्तथा कौसल्य रंस्यसे।
कच्चिच्छुद्धस्वभावेन श्रिया हीनो न शोचसि॥ २९॥
अनुवाद
कोसलराज! क्या तुम संयोग से जो कुछ भी प्राप्त करोगे, उसे लेकर पहले की तरह ही आनंदपूर्वक रह सकोगे? आज राजसी धन से वंचित होने पर भी क्या तुमने शुद्ध हृदय से शोक का त्याग कर दिया है?॥29॥
King of Kosal! Will you be able to live with the same joy as you used to live before, whatever you get by chance? Even after being deprived of the royal wealth today, have you given up grief from a pure heart?॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥