श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.104.2 
भीष्म उवाच
अत्रायं क्षेमदर्शीय इतिहासोऽनुगीयते।
तत् तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि तन्निबोध युधिष्ठिर॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! इस विषय में क्षेमदर्शी की कथा संसार में बार-बार कही जाती है। मैं तुमसे वही कहता हूँ। तुम ध्यानपूर्वक सुनो।
 
Bhishma said- Yudhishthira! In this matter, the story of Kshemadarshi is told again and again in the world. I will tell you the same. You listen carefully.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas