Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.16: यद्यपि वे धन की देवी हैं, फिर भी वे रुकती नहीं और जिनके पास धन नहीं है, उनके पास आती हैं; तथापि शोक में खोई हुई सम्पत्ति को वापस लाने की शक्ति नहीं है; इसलिए किसी भी प्रकार शोक नहीं करना चाहिए ॥16॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भूत्वा च न भवत्येतदभूत्वा च भविष्यति।
शोके न ह्यस्ति सामर्थ्यं शोकं कुर्यात् कथंचन॥ १६॥
अनुवाद
यद्यपि वे धन की देवी हैं, फिर भी वे रुकती नहीं और जिनके पास धन नहीं है, उनके पास आती हैं; तथापि शोक में खोई हुई सम्पत्ति को वापस लाने की शक्ति नहीं है; इसलिए किसी भी प्रकार शोक नहीं करना चाहिए ॥16॥
Even though she is the goddess of wealth, she does not stay and comes to those who do not have it; however, grief has no power to bring back the lost wealth; hence one should not grieve in any way. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥