Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.103.52: हे देवेश्वर! शास्त्रों के सिद्धान्तों पर ठीक से विचार करके मैंने तुम्हें दुष्ट पुरुष की पहचान के लिए ये लक्षण बताए हैं ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.103.52 
इति दुष्टस्य विज्ञानमुक्तं ते सुरसत्तम।
निशम्य शास्त्रतत्त्वार्थं यथावदमरेश्वर॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे देवेश्वर! शास्त्रों के सिद्धान्तों पर ठीक से विचार करके मैंने तुम्हें दुष्ट पुरुष की पहचान के लिए ये लक्षण बताए हैं ॥52॥
 
Best! Deveshwar! Considering the principles of the scriptures properly, I have told you these symptoms to identify an evil person. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)