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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.103.45 
इन्द्र उवाच
कानि लिङ्गानि दुष्टस्य भवन्ति द्विजसत्तम।
कथं दुष्टं विजानीयामेतत् पृष्टो वदस्व मे॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इंद्र ने पूछा, "हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! दुष्ट व्यक्ति के क्या लक्षण होते हैं? मैं दुष्ट व्यक्ति को कैसे पहचानूँ? कृपया मेरे इस प्रश्न का उत्तर दीजिए।"
 
Indra asked, 'O best of Brahmins! What are the characteristics of a wicked person? How do I recognize a wicked person? Please answer this question of mine.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)