Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.43: हे देवराज! राजा अपने लोगों के विषय में घोषणा करता है कि ‘ये लोग दुर्गुणों से भ्रष्ट हो गए हैं; इसलिए मैंने इन दुष्टों को राज्य से निकाल दिया है। ये दूसरे देश में चले गए हैं।’ ऐसा करके वह उन्हें शत्रुओं के राज्यों और नगरों का भेद लेने के लिए नियुक्त करता है। बाहर से तो वह उनके समस्त सुख-सुविधाएँ छीन लेता है; परन्तु गुप्त रूप से उन्हें प्रचुर धन देता है और उनके साथ कुछ अन्य घनिष्ठ व्यक्तियों को भी नियुक्त करता है॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रदाय गूढानि वसूनि राजन्
प्रच्छिद्य भोगानवधाय च स्वान्।
दुष्टान् स्वदोषैरिति कीर्तयित्वा
पुरेषु राष्ट्रेषु च योजयन्ति॥ ४३॥
अनुवाद
हे देवराज! राजा अपने लोगों के विषय में घोषणा करता है कि ‘ये लोग दुर्गुणों से भ्रष्ट हो गए हैं; इसलिए मैंने इन दुष्टों को राज्य से निकाल दिया है। ये दूसरे देश में चले गए हैं।’ ऐसा करके वह उन्हें शत्रुओं के राज्यों और नगरों का भेद लेने के लिए नियुक्त करता है। बाहर से तो वह उनके समस्त सुख-सुविधाएँ छीन लेता है; परन्तु गुप्त रूप से उन्हें प्रचुर धन देता है और उनके साथ कुछ अन्य घनिष्ठ व्यक्तियों को भी नियुक्त करता है॥ 43॥
O king of gods! The king proclaims about his own men that 'These people have become corrupted by vices; therefore I have expelled these wicked people from the kingdom. They have gone to another country.' After doing so, he appoints them to spy on the kingdoms and cities of the enemies. Outwardly he snatches away all their material pleasures; but secretly he gives them abundant wealth and appoints some other close people along with them.॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥