श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.103.3 
बृहस्पतिं देवपतिरभिवाद्य कृताञ्जलि:।
उपसंगम्य पप्रच्छ वासव: परवीरहा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले देवताओं के राजा इन्द्र ने बृहस्पति के पास जाकर हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया और इस प्रकार पूछा ॥3॥
 
Once upon a time, Indra, the king of gods, the slayer of enemy warriors, went to Brihaspati and folded his hands and bowed to him and asked as follows. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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