Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.29: यदि राजा का सामना बलवान शत्रु से हो और समय उसके अनुकूल हो, तो उसे उसके सामने झुकना चाहिए और जब शत्रु लापरवाह हो, तो उसे स्वयं सावधान और परिश्रमी होकर उसे मारने का उपाय खोजना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रणिपातं च गच्छेत काले शत्रोर्बलीयस:।
युक्तोऽस्य वधमन्विच्छेदप्रमत्त: प्रमाद्यत:॥ २९॥
अनुवाद
यदि राजा का सामना बलवान शत्रु से हो और समय उसके अनुकूल हो, तो उसे उसके सामने झुकना चाहिए और जब शत्रु लापरवाह हो, तो उसे स्वयं सावधान और परिश्रमी होकर उसे मारने का उपाय खोजना चाहिए।
If the king is faced with a strong enemy and the time is favorable to him, then he should bow down before him and when the enemy is careless, then he himself should be cautious and industrious and should search for a way to kill him. 29.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥