Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.25: मृदुता, दण्ड, आलस्य और प्रमाद - इन चारों का नाश करके उसे शत्रु की माया का भी प्रतीक बनाना चाहिए। तत्पश्चात् वह बिना विचारे शत्रुओं पर आक्रमण कर सकता है। 25॥ | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृदुता, दण्ड, आलस्य और प्रमाद - इन चारों का नाश करके उसे शत्रु की माया का भी प्रतीक बनाना चाहिए। तत्पश्चात् वह बिना विचारे शत्रुओं पर आक्रमण कर सकता है। 25॥
By destroying these four – softness, punishment, laziness and carelessness – he should also symbolize the illusion of the enemy. After that he can attack the enemies without thinking. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥