श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.103.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
बृहस्पतेश्च संवादमिन्द्रस्य च युधिष्ठिर॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - 'युधिष्ठिर! इस विषय में विद्वान पुरुष बृहस्पति और इन्द्र के संवाद रूपी प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं॥2॥
 
Bhishmaji said – ‘Yudhishthir! In this matter, learned men give the example of an ancient history in the form of dialogue between Jupiter and Indra. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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