Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.19: राजा को अपने शत्रुओं पर तुरंत आक्रमण नहीं करना चाहिए। उसे अवश्यंभावी विजय सुनिश्चित करने के उपाय सोचने चाहिए। उसे न तो उन पर विष का प्रयोग करना चाहिए और न ही कठोर शब्दों से उन्हें चोट पहुँचानी चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न सद्योऽरीन् विहन्याच्च द्रष्टव्यो विजयो ध्रुव:।
न शल्यं वा घटयति न वाचा कुरुते व्रणम्॥ १९॥
अनुवाद
राजा को अपने शत्रुओं पर तुरंत आक्रमण नहीं करना चाहिए। उसे अवश्यंभावी विजय सुनिश्चित करने के उपाय सोचने चाहिए। उसे न तो उन पर विष का प्रयोग करना चाहिए और न ही कठोर शब्दों से उन्हें चोट पहुँचानी चाहिए।
The king should not attack his enemies immediately. He should think of ways to ensure an inevitable victory. He should neither use poison on them nor hurt them with harsh words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥