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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश
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श्लोक 1
श्लोक
12.102.1
युधिष्ठिर उवाच
जयित्र्या: कानि रूपाणि भवन्ति भरतर्षभ।
पृतनाया: प्रशस्तानि तानि चेच्छामि वेदितुम्॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे भरतश्रेष्ठ! विजयी सेना के शुभ लक्षण क्या हैं? मैं यह जानना चाहता हूँ।"
Yudhishthira asked, 'O best of the Bharatas! What are the auspicious signs of a victorious army? I want to know this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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