Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.101.8: जिनकी वाणी हिरण के समान और जिनकी आँखें व्याघ्र या बैल के समान हैं, वे वीर, उतावले, लापरवाह और मूर्ख होते हैं। जिनकी वाणी किंकिणी के समान मधुर होती है, वे स्वभाव से बहुत क्रोधी होते हैं ॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.101: भिन्न-भिन्न देशके योद्धाओंके स्वभाव, रूप, बल, आचरण और लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिनकी वाणी हिरण के समान और जिनकी आँखें व्याघ्र या बैल के समान हैं, वे वीर, उतावले, लापरवाह और मूर्ख होते हैं। जिनकी वाणी किंकिणी के समान मधुर होती है, वे स्वभाव से बहुत क्रोधी होते हैं ॥8॥
Those whose voice resembles that of a deer and whose eyes resemble those of a tiger or a bull are brave, impetuous, careless and foolish. Those whose voice is as sweet as that of a kinkini are very short-tempered by nature. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥