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श्लोक 12.101.20  |
अधार्मिका भिन्नवृत्ता: सान्त्वेनैषां पराभव:।
एवमेव प्रकुप्यन्ति राज्ञोऽप्येते ह्यभीक्ष्णश:॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| वे अधार्मिक हैं और धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करते हैं। इसी प्रकार वे राजा पर भी प्रायः क्रोधित हो जाते हैं; अतः उन्हें मधुर वचनों से समझाकर वश में करना चाहिए। |
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| They are irreligious and violate the limits of religion. Similarly, they often become angry with the king; hence they should be brought under control by persuading them with sweet words. |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि विजिगीषमाणवृत्ते एकाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें विजयाभिलाषी राजाका बर्तावविषयक एक सौ एकवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०१॥
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