| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 101: भिन्न-भिन्न देशके योद्धाओंके स्वभाव, रूप, बल, आचरण और लक्षणोंका वर्णन » श्लोक 2 |
|
| | | | श्लोक 12.101.2  | भीष्म उवाच
यथाऽऽचरितमेवात्र शस्त्रं पत्रं विधीयते।
आचाराद् वीरपुरुषस्तथा कर्मसु वर्तते॥ २॥ | | | | | | अनुवाद | | भीष्मजी बोले, 'हे राजन! योद्धाओं के अस्त्र-शस्त्र और वाहन उनके देश और कुल की रीति-रिवाज के अनुसार होने चाहिए। वीर पुरुष अपनी परम्परागत रीति-रिवाज के अनुसार ही अपने सब कार्य करता है।॥ 2॥ | | | | Bhishmaji said, 'O King! The arms and vehicles of the warriors should be in accordance with the customs of their country and clan. A brave man performs all his tasks according to his traditional customs.॥ 2॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|