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mahabharat 12.101.14-15: जिनके नेत्र तिरछे, माथा ऊँचा, ठोड़ी मांसहीन और पतली है, जिनकी भुजाओं पर वज्र का चिह्न है और जिनकी अंगुलियों पर चक्र का चिह्न है तथा जिनकी नसें और स्नायु स्पष्ट दिखाई देते हैं, वे युद्ध आरम्भ होते ही बड़े वेग से शत्रुओं की सेना में प्रवेश करते हैं और उन्मत्त हाथियों के समान होते हैं जिन्हें शत्रुओं के लिए हराना कठिन होता है॥14-15॥   |   mahabharat अध्याय 12.101: भिन्न-भिन्न देशके योद्धाओंके स्वभाव, रूप, बल, आचरण और लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 101: भिन्न-भिन्न देशके योद्धाओंके स्वभाव, रूप, बल, आचरण और लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  12.101.14-15 
जिह्माक्षा: प्रललाटाश्च निर्मांसहनवोऽपि च।
वज्रबाह्वंगुलीचक्रा: कृशा धमनिसंतता:॥ १४॥
प्रविशन्ति च वेगेन साम्पराये ह्युपस्थिते।
वारणा इव सम्मत्तास्ते भवन्ति दुरासदा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जिनके नेत्र तिरछे, माथा ऊँचा, ठोड़ी मांसहीन और पतली है, जिनकी भुजाओं पर वज्र का चिह्न है और जिनकी अंगुलियों पर चक्र का चिह्न है तथा जिनकी नसें और स्नायु स्पष्ट दिखाई देते हैं, वे युद्ध आरम्भ होते ही बड़े वेग से शत्रुओं की सेना में प्रवेश करते हैं और उन्मत्त हाथियों के समान होते हैं जिन्हें शत्रुओं के लिए हराना कठिन होता है॥14-15॥
 
Those whose eyes are slanted, forehead is high, chin is fleshless and thin, on whose arms there is the mark of thunderbolt and on whose fingers there is the mark of discus and whose veins and nerves are visible, they enter the enemy's army with great speed as soon as the battle begins and are like mad elephants difficult for the enemies to defeat.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)