| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन » श्लोक 50 |
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| | | | श्लोक 12.100.50  | क्ष्वेडा: किलकिलाशब्दा: क्रकचा गोविषाणिका:।
भेरीमृदङ्गपणवान् नादयेयु: पुराश्चरान्॥ ५०॥ | | | | | | अनुवाद | | जो सेना में आगे हैं, वे क्रकच, नरसिंह, भेरी, मृदंग और ढोल आदि बाजे बजाते हुए जोर से गर्जना और जयजयकार करें॥ 50॥ | | | | Those who are in the forefront of the army should roar and shout loudly while playing the instruments like Krakacha, Narasimha, Bheri, Mridanga and Dhol etc.॥ 50॥ | | | इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि सेनानीतिकथने शततमोऽध्याय:॥ १००॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें सेनानीतिका वर्णनविषयक सौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १००॥
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