श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.100.31 
दशाधिपतय: कार्या: शताधिपतयस्तथा।
तत: सहस्राधिपतिं कुर्याच्छूरमतन्द्रितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
सेना में कुछ लोगों को दस-दस सैनिकों का नेता, कुछ को सेनापति तथा किसी प्रमुख एवं वीर योद्धा को एक हजार योद्धाओं का नेता नियुक्त किया जाना चाहिए।
 
Some people in the army should be made leaders of ten soldiers each, some should be made commanders, and some prominent and brave warrior should be appointed as the leader of a thousand warriors. 31.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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