श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.100.30 
अनीकं ये विभिन्दन्ति भिन्नं संस्थापयन्ति च।
समानाशनपानास्ते कार्या: द्विगुणवेतना:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो लोग शत्रु की सेना को खंडित कर दें तथा उनकी बिखरी हुई सेना को संगठित करने और दृढ़तापूर्वक स्थापित करने की शक्ति रखते हों, राजा को चाहिए कि उन्हें अपने समान खाने-पीने की सुविधा देकर सम्मानित करें तथा उन्हें दुगुना वेतन दें।
 
Those who break up the enemy's army and have the power to organise and establish their scattered army firmly, the king should honour them by providing them with food and drink facilities equal to his own and pay them double the salary. 30.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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