श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  12.100.16-17 
परेषामुपसर्पाणं प्रतिषेधस्तथा भवेत्।
आकाशात् तु वनाभ्याशं मन्यन्ते गुणवत्तरम्॥ १६॥
बहुभिर्गुणजातैश्च ये युद्धकुशला जना:।
उपन्यासो भवेत् तत्र बलानां नातिदूरत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस स्थान पर शत्रुओं के आक्रमण को रोकने के लिए सुविधाएँ होनी चाहिए। युद्ध में कुशल पुरुष अनेक गुणों के कारण खुले मैदान की अपेक्षा वन के निकट के स्थान को सेना का पड़ाव डालने के लिए अधिक लाभदायक मानते हैं। सेना को उसी वन के निकट पड़ाव डालना चाहिए।॥16-17॥
 
There should be facilities to prevent enemy attacks at that place. Men skilled in warfare consider a place near a forest more beneficial for setting up an army camp than an open field due to several qualities. The army should be camped near that forest.॥16-17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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