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mahabharat 12.10.6: विद्वान पुरुष कहते हैं कि यह सब आत्मा का आहार है, स्थावर-जंगम यह सारा जगत् आत्मा का आहार है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.10.6 
प्राणस्यान्नमिदं सर्वमिति वै कवयो विदु:।
स्थावरं जङ्गमं चैव सर्वं प्राणस्य भोजनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष कहते हैं कि यह सब आत्मा का आहार है, स्थावर-जंगम यह सारा जगत् आत्मा का आहार है ॥6॥
 
Learned men say that all this is the food of the soul, the whole world, movable and immovable, is the food of the soul. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)